
पंच केदारों में चतुर्थ केदार श्री रुद्रनाथ मंदिर के कपाट सोमवार को विधि विधान से ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए गए हैं। इस दौरान रुद्रनाथ क्षेत्र हर-हर महादेव और रुद्रनाथ जी के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।बता दे किदेवभूमि उत्तराखंड में चार धाम यात्रा का आगाज हो चुका है।और कहा जाता है कि भगवान शिव के पांचो मंदिरों पंचकेदार के बिना शिव की यात्रा अधूरी रहती है।मान्यताओं के अनुसार पांडव महाभारत युद्ध के बाद पाप मुक्ति के लिए शिव को खोज रहे थे तो शिव ने बैल का रूप धारण कर लिया था लेकिन भीम ने उन्हें पहचान लिया तब शिव पृथ्वी में विलीन हो गए,जिसके बाद केदारनाथ, तुंगनाथ,रुद्रनाथ, मध्यमहेश्वर और कल्पेश्वर इन पांच स्थानों पर उनके अंग प्रकट हुए।केदारनाथ में शिव के पीठ की पूजा की जाती है।तुंगनाथ में शिव की भुजाओं की पूजा होती है।रुद्रनाथ में शिव के मुख की पूजा की जाती है।मध्यमहेश्वर में शिव की नाभि धड़ की पूजा की जाती है। कल्पेश्वर में शिव की जटाओं की पूजा की जाती है।
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