देवभूमि उत्तराखंड में चार धाम यात्रा का आगाज हो चुका है।और कहा जाता है कि भगवान शिव के पांचो मंदिरों पंचकेदार के बिना शिव की यात्रा अधूरी रहती है।मान्यताओं के अनुसार पांडव महाभारत युद्ध के बाद पाप मुक्ति के लिए शिव को खोज रहे थे तो शिव ने बैल का रूप धारण कर लिया था लेकिन भीम ने उन्हें पहचान लिया तब शिव पृथ्वी में विलीन हो गए,जिसके बाद केदारनाथ, तुंगनाथ,रुद्रनाथ, मध्यमहेश्वर और कल्पेश्वर इन पांच स्थानों पर उनके अंग प्रकट हुए।केदारनाथ में शिव के पीठ की पूजा की जाती है।तुंगनाथ में शिव की भुजाओं की पूजा होती है।रुद्रनाथ में शिव के मुख की पूजा की जाती है।मध्यमहेश्वर में शिव की नाभि धड़ की पूजा की जाती है। कल्पेश्वर में शिव की जटाओं की पूजा की जाती है।चार धाम यात्रा 2026 के तहत इस वर्ष केदरनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को,मध्यमहेश्वर के 21 मई को,रुद्रनाथ के 18 मई को,तुंगनाथ के 22 अप्रैल को जबकि कल्पेश्वर के कपाट वर्ष भर खुले रहते है।
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