माँ नैना देवी व्यापार मंडल नैनीताल के अध्यक्ष पुनीत टंडन ने कहा कि नैनीताल में नववर्ष के मौके पर पर्यटकों की हर साल गिरती आमद चिंता का विषय प्रदेश स्तर पर गहन समीक्षा नहीं हुई तो संकट गहराएगा व्यवसायियों के परिवार और बच्चों के लिए भविष्य में आर्थिक संकट स्वाभाविक इन हालातों के सुधार के लिए एक मजबूत और बुलंद आवाज उठाना जरूरी है।नैनीताल के व्यवसायियों का दर्द देखता हूँ अपने को रोक पाना कठिन होता है। इस नव वर्ष भी यही हुआ एक बार पुनः पर्यटन व्यवसाय बीतें वर्षों की भांति पर्यटकों को १०० से १५० किलोमीटर पहले से रोकने डाइवर्ट करने और अवरोध उत्पन्न करने और पुलिस की इन सवालों की सफ़ाइयों के बीच बलि चड़ गया।आगे पढ़ें क्या कहा पुनीत टंडन ने…..

चिंता के विषय मूल रूप से दो दिन के व्यापार से ज़्यादा साल दर साल बार बार ये होना और आगे भविष्य में क्या इस प्रकार से होता आयेगा या प्रशासन और पुलिस का रवैया पर्यटक को भगाओ से वाक़ई में पर्यटकों के स्वागत करने में तब्दील कभी हो पाएगा। यह एहसास बेहद जरूरी है की नववर्ष के इस पाँच से साथ दिन के व्यवसाय से सभी का आने वाले दो से तीन माह का आर्थिक हिसाब किताब चलता है। और इस साल के अंतिम व्यवसाय केआयाम को चोट पहुंचाना नैनीताल ने व्यवसायियों की रोज़ी पर सीधा आघात ही नहीं बल्कि परिवारों को आर्थिक संकट और मानसिक तनाव में डालने वाला प्रकरण है।पाँच सात दिन पहले प्रशासनिक मीटिंग्स करना और मीटिंग में बीते वर्षों से बिना कुछ सीखे बीते ही वर्षों की भाती वही रवैया और वो ही नाकाम रूट प्लान डायवर्सन इत्यादि अपनाना साथ ही संगठन प्रतिनिधियों के सुझावों को अनसुना करना और यह कह देना के बीते वर्षों में भी ऐसा होता आया है एक ग़लत नियम जैसा बन गया है जिसे बदलना होगा। अत्यधिक वायरल वीडियो में बार बार चेतावनियां देना भी पर्यटक को नैनीताल आने का मन में अवरोध पैदा करता हैं।आगे पढ़ें क्या कहा पुनीत टंडन ने…….
पर्यटक की नैनीताल के प्रति छवि पहले से ही पार्किंग इत्यादि को ले कर बेहद धूमिल हो चुकी है। हम नैनीताल में बीते दस सालों में केवल इस समस्या के समाधान की बात ही कर रहे हैं पर कार्य इस तरफ़ शून्य है। पहले नैनीताल में होने वाले बंगाली सीजन और गुजराती सीजन तो केवल नाम मात्र के लिए रह गए है। हम नैनीताल की लोकप्रियता को देश विदेश में होने की बात करते हैं लेकिन हालत ये है की उत्तर भारत के लिए नैनीताल जो से सरल डेस्टिनेशन है वे भी अब आने से कतराने लागे है। ना हमने रेल यात्रा ना हवाई यात्रा पर कोई सीरियस ध्यान दिया है। वंदे भारत या पंतनगर हवाई अड्डे का नवीनीकरण केवल बातों की बलि चड़ गया है। जो रहा सहा पर्यटक कैची धाम की बड़ती लोकप्रियता से थोड़ा बहुत नैनीताल आ जाता है उसे भी अब इसी प्रकार की नकारात्मक व्यवस्थाऔ की बलि चढ़ाया जा रहा है। कैची धाम की पार्किंग में लंबे समय से कार्य और अभी जैसे हालात है आगे भी कुछ वर्ष पूरा होता नहीं दिखता। वहाँ भी इस कमी से ट्रैफिक रोकना शटल इत्यादि श्रद्धालुओं के लिए मुसीबत बन गया है।इन और ऐसी अनेकों और सीरियस दिक्कतों को अगर प्रदेश स्तर से एक नैनीताल के लिए एक पर्यटन सेंट्रिक पालिसी के तहत जल्द नहीं सुलझाया गया तो वो दिन दूर नहीं नैनीताल पर्यटन के लिए पर्यटकों के नक्शे से ही कहीं लुप्त हो जाएगा।यह एक चिंता का विषय होने के साथ नैनीताल पर्यटन से जुड़े व्यवसायियों के लिए उनके परिवारों और बच्चों के भविष्य के लिए बहुत बड़ा सवाल है की क्या आने वाले समय में इसमें कुछ सुधार होगा और अगर नहीं तो हम सभी को एकजुटता से मिलकर इस पर मजबूत और बुलंद आवाज उठाना अव्याशक है।
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