उत्तराखण्ड

15 दिन का अर्जित अवकाश के बीच क्या बोले पूर्व सीएम हरीश रावत

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देहरादून। मैंने 15 दिन का अर्जित अवकाश लिया। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के मध्य वर्षों काम किया। इसलिये अर्जित अवकाश का महत्व मेरे मन में रचा-बसा है और अवकाश भी ऐसा लिया जिसके दौरान मैं निरंतर अपने सामाजिक दायित्वों को पूरा कर रहा हूं। मेरा सौभाग्य है कि मैं जहाँ कहीं जाता हूँ तो ये लगता है कि कांग्रेस लोगों के बीच में आ गई है। फिर भी कई लोग दनादन गोले बरसा रहे हैं। मुझ पर गोले बरसाने वालों में तीन प्रकार के लोग हैं। एक तो मेरे कुछ कांग्रेस के भाई-बहन हैं। मैं उनसे तो पूछ ही सकता हूं कि क्या अर्जित अवकाश लेना अपराध है? अर्जित अवकाश लेने से मैंने क्या ऐसा कर दिया जिससे हमारे साथियों को गुस्सा व चिंतित होकर के दनादन सोशल मीडिया में मुझ पर गोले दागने पड़ रहे हैं। आगे पढ़ें क्या कहा पूर्व सीएम ने..


इन लोगों में कई लोग ऐसे हैं जिन्होंने 2022 में मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मामले को मुझ पर चस्पा करने के लिए AI का सहारा लेकर क्रिएटिव बनाये और पोस्ट डाली, उनके ये कृत्य मेरे पास आज भी संरक्षित हैं और आज भी ये AI का सहारा लेकर मेरी छवि बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं।दूसरे वह लोग हैं जो कांग्रेस के कटु आलोचक हैं, उनमें से आधे लोग भाजपानिष्ठ हैं, जिन्होंने हमारे नेताओं और हमारी हमेशा आलोचना की है। वह भी मेरे अर्जित अवकाश से बहुत बेचैन हैं और लंबे-लंबे लेख लिखे जा रहे हैं, लंबी-लंबी पोस्ट डाले जा रहे हैं, लंबी-लंबी कास्टिंग हो रही है, फेसबुक/सोशल मीडिया पर यह जताने की कोशिश हो रही हैं कि हरीश रावत कांग्रेस पर अब भार ही भार है। जब उन लोगों का पूरा ब्यौरा देखा तो आश्चर्य हो रहा है कि उनको कांग्रेस की इतना चिंता क्यों हो रही है, जो वह हरीश रावत रूपी भार को निपटा देना चाहते हैं? आप उनकी पोस्ट व लेखों को पढ़िए तो उन्होंने ढूंढ-ढूंढ करके मेरे सार्वजनिक जीवन के उन प्रसंगों को उकेरा है, जहां मैं विफल हुआ हूं या हारा हूं। इनमें से कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है कि उसने समालोचना के तौर पर भी कांग्रेस के पक्ष को रखा हो! हमेशा भाजपा के पक्ष को रखा है और कांग्रेस पर बरसते रहे हैं, मगर उनको आज कांग्रेस की बहुत चिंता हो रही है तो मैं कम से कम इस बात का सुकून महसूस कर रहा हूं कि बहुत सारे कांग्रेस के आलोचकों को मैंने अपने इस अर्जित अवकाश की बात कहकर इन्हें कांग्रेस के पक्ष में कर दिया है। मैं उम्मीद करता हूँ कि वो भविष्य में भी कांग्रेस के पक्ष में लिखेंगे। भाजपा से जुड़े लोगों में एक वो पक्ष भी है जिनकी फेसबुक आईडी खंगालने के बाद मुझे इस तथ्य की जानकारी हुई कि वो वही लोग हैं और वही प्लेटफार्म हैं, जिन्होंने कुछ दिनों पहले मुझे पाकिस्तान का जासूस दिखाकर मुझे गोली मारने का वीडियो सार्वजनिक किया था और ये वही लोग मुझे बराबर मुस्लिम टोपी पहने हुए दिखाते हैं और यह भूल जाते हैं कि उनके बूबू स्वर्गीय आदरणीय अटल बिहारी वाजपेई जी, आदरणीय लालकृष्ण आडवाणी जी, आदरणीय राजनाथ सिंह जी, श्री नितिन गडकरी जी, श्री नीतीश कुमार जी भी वही टोपी पहने हुए कई अवसरों पर चित्रित हुए हैं। आदरणीय मोदी जी भी गमछा आदि धारण कर मुस्लिम भाइयों से सम्मान लेते चित्रित हुए हैं।
तीसरे मेरे कुछ ऐसे दोस्त भी विचलित हैं और पोस्ट डाल रहे हैं, जो इस समय परिवर्तन की आकांक्षी हैं। मैं उन दोस्तों से कहना चाहता हूँ कि हरीश रावत अपने सिद्धांतों पर अटल खड़ा है जिसमें उत्तराखंडियत भी सम्मिलित है। आपके शब्दों का मैं आदर करता हूँ। मगर याद रखियेगा कि आज के इस बदले हुए राजनीति परिवेश में मैं आपकी सोच को आगे बढ़ाने वाला वाचाल संदेशवाहक हूँ। आगे पढ़ें……

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स्मरण करें 2017 और उसके बाद हुए समस्त चुनावों में उत्तरी भारत में भाजपा के मुकाबले में किसी भी राजनीतिक दल का वोट प्रतिशत नहीं बढ़ा है, पंजाब अपवाद है। 2017 में हमारी सीटें कम हुई, मैं दो जगह से चुनाव हारा, मगर 2012 के मुकाबले 2017 में कांग्रेस का मत प्रतिशत लगभग 0.2 प्रतिशत बढ़ा। यह तब बढ़ा जब एक बड़ा तबका कांग्रेस से बगावत कर भाजपा में सम्मिलित हुआ और स्वयं तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अपनी सरकार और मुख्यमंत्री को सार्वजनिक रूप से कटघरे में रख रहे थे और लोगों को भड़काने के लिए सार्वजनिक बयान दे रहे थे। यह प्रतिशत तब बढ़ा जब उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में कांग्रेस और सपा गठबंधन के पांव तले सारी मिट्टी उखड़ गई। सपा और कांग्रेस के मत प्रतिशत में भारी गिरावट आई। 2022 में भी हमारा मत प्रतिशत 2012 के मुकाबले लगभग 4.41 प्रतिशत बढ़ा और यह भी सत्य है कि मैं कैम्पेन कमेटी का चेयरमैन था, मगर तत्कालीन प्रभारी दर्जनों बार ये स्पष्ट कर चुके थे कि ये चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़ा जा रहा है और मुझे राज्य में चुनाव प्रचार के लिए एक दिन भी हेलीकॉप्टर उपलब्ध नहीं करवाया गया। मैं जहाँ भी चुनाव प्रचार में गया हेलीकॉप्टर का खर्चा मैंने और मेरे दोस्तों ने वहन किया। कांग्रेसजनों के अथक परिश्रम से कांग्रेस अपने 2012 के बेस वोट को बचाने में ही नहीं बल्कि बढ़ाने में भी सफल हुई।
वर्ष 2024 में मैं हरिद्वार में चुनाव लड़ने और अभियान के लिए उत्तरदायी था, उस समय हरिद्वार में कांग्रेस 6 विधानसभा सीटों में बहुमत पाई और उत्तरी भारत में कांग्रेस जहाँ-जहाँ हारी, ऐसी हार वाली सीटों में कांग्रेस को केवल हरिद्वार में ही 4,87,406 इतने मत मिले। मैं आभारी हूँ कि लोगों ने इस सिपाही की सेवाओं को इतना सम्मान दिया और मैं स्मरण कराते चलूँ कि मैंने वर्ष 1989 और 2009 का चुनाव अत्यधिक संघर्षपूर्ण स्थितियों में जीता। राम और अटल लहर में भी मेरी और मेरी पत्नी का हार का प्रतिशत 1991 और 1999 में 25 हज़ार के आस-पास रहा।दोस्तों हरीश रावत जीत और हार, दोनों में सदाबहार है‌। आप मेरी चिंता कर रहें हैं, मैं आभारी हूँ।

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