अर्ज़,मर्ज,खर्च किसे बताओगे?
जो ख्वाब और हकीकत के बीच में जी रहे हो,उसे कैसे किसी को समझाओगे
कीमत,किस्मत,ख्वाहिश सबका सबक एक है,
पर,
इनके अर्थ में खुद के अस्तित्व को कैसे बताओगे?
तुम कैसे हर पल गुजार रहे हो,ये तो तुम ही जानते हो,
कीमत लगती है ख्वाबों की, जो पूरे होते है किस्मत से, और जो हासिल होंगे मेहनत से,
हर पल में, जो अधूरेपन की सदिया गुजार रहे हो, उसे देख अब डर लगता है ,
ना जाने कब तुम, ख्वाबों की कीमत लगा पाओगे?
कुछअनकहेएहसास #mani
@KUCH_ANKAAHE_EHSAAS
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