देवभूमि उत्तराखंड के पहाड़ की बेटियां भी अब किसी से कम नही है,अब बेटियां बेटो से हर क्षेत्र में आगे निकल रही है।और हौसला भी अब बेटियों का सातवे आसमान पर पहुच चुका है।पौड़ी गढ़वाल के गिंवाली गांव निवासी टैक्सी चालक कमलेश राणा के निधन के बाद उनकी पुत्री सानिया राणा ने पिता की जगह घुमावदार पहाड़ी रास्तों पर टैक्सी चलाकर अपने परिवार का भरण पोषण कर रही है। बीते 2 फरवरी को सानिया के पिता के निधन के बाद से परिवार भारी आर्थिक तंगी से जूझना लगा था तब बेटी ने पिता की विरासत उनकी टैक्सी को चलाने का फैसला लिया।और महज 18 साल की उम्र में ही कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस बनवा लिया था। अब वह सतपुली, नौगांवखाल, चौबट्टाखाल के अलावा कोटद्वार और देहरादून जैसे लंबे पहाड़ी रास्तों पर भी नियमित रूप से सवारियां ले जाती हैं।टैक्सी चलाने के साथ-साथ सानिया राजकीय महाविद्यालय चौबट्टाखाल से अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई भी कर रही हैं। अपनी इस कमाई से वह न सिर्फ घर का खर्च चला रही हैं, बल्कि गाड़ी के लिए लिए गए बैंक लोन की किस्तें भी समय पर चुका रही हैं। सानिया अपनी मां, भाई-भाभी और बड़ी बहन के साथ रहती हैं और आज परिवार का मुख्य आर्थिक सहारा बन चुकी हैं।
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